प्रहरी आंखे और बीएसएनएल की गहरी तन्द्रा
पिछले सप्ताह मुझे एक ऐसा अनुभव हुआ जो बड़े शहरों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बहुत असामान्य नहीं था। फिर भी, यह इतना प्रभावशाली तो अवश्य था कि मुझ जैसा सेवानिवृत्त व्यक्ति, जिसे समय की कोई कमी नहीं है, इस पर एक कहानी बुने बिना नहीं रह सका।
मैं अपनी गेटेड कॉलोनी के बाहर रात्रि भोजन के उपरान्त सैर कर रहा था और जैसे कि मैं आमतौर पर करता हूं, मैं अपने मोबाइल पर एक मित्र से बात कर रहा था। अचानक, मुझे अपनी कनपटी पर एक हलका झटका महसूस हुआ। मुझे एक सेकंड का समय लगा यह समझने में कि जो मोबाइल मैंने अपने कान के पास रखा था, वह अब मेरे हाथ में नहीं था। मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा और पाया कि एक युवक, जो काले कपड़े पहने हुए था, मुझसे विपरीत दिशा में तेजी से दौड़ रहा था। वह पहले ही बीस फीट आगे था लेकिन मैंने उसका पीछा करना शुरू किया l वह हिरन की तरह कुलांचे भर रहा था और मैं बत्तख की चाल चल रहा था l
सड़क अँधेरी और सुनसान थी l इसे किसी भी दृष्टिकोण से बराबरी की प्रतियोगिता तो नहीं कहा जा सकता था; मैं एक पेशेवर भगोड़े से मुकाबला कर रहा था । मैं फिर भी पीछा करता लेकिन मेरे ‘शिकार’ के पास एक और साथी था जो पचास मीटर दूर एक दोपहिया वाहन पर उसका इंतजार कर रहा था। एक निपुण करतबबाज की तरह वह चोर गाड़ी के पीछे की सीट पर चढ़ा और तुरंत आंखों से ओझल हो गया। मैंने पीछा छोड़ दिया और हार मान ली। मैंने खुद को यह दिलासा दिया कि जंगलों में भी जब बाघ शिकार पर निकलता है तो बीस प्रयासों में औसतन केवल एक बार ही सफल होता है। और यहाँ तो घात लगाकर मुझ ही पर हमला हुआ था ।
मैं चोरी की शिकायत लिखवाने थाने पहुंच गया । मुझे यह कानूनी ज्ञान तो पहले से था कि डकैती और लूट में अंतर है, हालांकि ये दोनों एक आम व्यक्ति के लिए समान हैं। अब, मुझे यह भी पता चला कि स्नैचिंग और चोरी आई पी सी की विभिन्न अपराध धाराओं के तहत आते हैं। एक सामान्य आदमी के लिए, चोरी और स्नैचिंग का मतलब एक हो सकता है- किसी और की संपत्ति का अवैध कब्जा। फिर भी, कानून एजेंसियां इन्हें अलग-अलग मानती हैं।
एफआईआर लिखने वाला पुलिसकर्मी अपनी प्रश्नों की झड़ी लगाता रहा , लेकिन मैं चुप था। क्या मैंने अपराधी का चेहरा देखा? क्या मैंने भागते हुए वाहन का नंबर प्लेट देखी? अपराधी की उम्र क्या थी? वाहन का रंग क्या था? जब मैंने अधिकांश सवालों का कोई जवाब नहीं दिया तो उसने अवश्य यह निष्कर्ष निकाला होगा कि मैं या तो गूंगा हूं या सदमे में हूं ।
संयोगवश, उस समय पुलिस स्टेशन में एक व्यक्ति मिठाई का डब्बा लेकर घूम रहा था और मुझे भी एक बर्फी लेने के लिए कहा गया। मुझे हाल ही में नेटफ्लिक्स पर देखी वेब सीरीज, ब्लैक वारंट, याद आ गई, जिसमें चार्ल्स सोबराज ने तिहाड़ जेल से भागने के पहले जेल स्टाफ को नशीली मिठाई बाँट कर बेहोश कर दिया था । मेरे औपचारिक विरोध के बावजूद, मुझे एक मिठाई खानी पड़ी । यह एक अतिशयोक्ति लग सकती है लेकिन मुझसे यह भी पूछा गया कि क्या मैं चाय पीना चाहूंगा । मैं पहले से ही अजीबो गरीब स्थिति में था - पुलिस वाले मेरे मोबाइल के चोरी होने पर मुझे मिठाई जो खिला रहे थे l
मैं समाचार बन गया !
मैं आभारी हूं कि पुलिसकर्मियों की एक टीम तुरंत घटना स्थल पर मेरे साथ गई। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि उनकी तत्परता आंशिक रूप से उनके अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक से एक फोन कॉल की वजह से थी, जिनसे इस मामले में मेरी सहायता की मांग पहले ही की जा चुकी थी । पुलिस द्वारा स्थल की जांच के बाद मुझे आश्वासन दिया गया कि मेरा फोन वापस मिल जाएगा, हालांकि मुझे ऐसा लग रहा था कि यह घास के ढेर में सुई ढूंढने जैसा है।
अगली रात, मुझे कॉलोनी के सुरक्षा गार्ड ने बताया कि दो पुलिसकर्मी वहां के प्रवेश द्वार पर लगे कैमरे की रिकॉर्डिंग देखना चाह रहे थे और उन्हें इसके लिए रिकॉर्डिंग का पासवर्ड चाहिए था। मैं हैरान होकर अपने घर से बाहर निकला और पुलिसकर्मियों को बताया कि घटना कॉलोनी के गेट पर नहीं, बल्कि मुख्य सड़क पर कम से कम 70 मीटर दूर हुई थी।
उनकी कोशिश ने मुझे मुल्ला नसरुद्दीन की एक मजेदार कहानी याद दिलाई, जिसमें वह एक स्ट्रीट लाइट के नीचे अपनी चाबी ढूंढ़ रहा था। जब उसके दोस्त ने उससे पूछा कि उसने चाबी कहां खो दी थी, तो मुल्ला नसरुद्दीन ने दूर एक अंधेरे कोने की ओर इशारा किया। अपने दोस्त के उलझन भरे चेहरे को पढ़ते हुए मुल्ला नसरुद्दीन ने समझाया कि जहां उसने चाबी गिराई थी, वहां अंधेरा था, इसलिए वह उस स्थान पर चाबी ढूंढ़ रहा था जहाँ प्रकाश था । हालांकि, इस मामले में पुलिस की रणनीति समझने के बाद मुझे अपनी गलती का आभास हुआ l पुलिस स्टेशन में बर्फी खाने के बाद अब मुझे उनके हाथों मुंह की खानी पड़ी थी ।
पुलिसकर्मियों ने मुझे धैर्यपूर्वक सुना और जवाब दिया, “सर, हम सीसीटीवी रिकॉर्डिंग देख रहे हैं ताकि हम यह पता कर सकें कि आप कॉलोनी के गेट से कितने बजे बाहर निकले थे। हम उस सड़क पर स्थित दुकानों और घरों में लगे कैमरों को स्कैन करेंगे, जिस पर अपराधी भागे थे। आपके बाहर निकलने का समय जान कर हम उसी फुटेज पर ध्यान केंद्रित करेंगे जिस से संदिग्ध वाहन और दो फरार अपराधियों को ढूंढने में सहायता मिलेगी l” उनके तर्कसंगत और विधिपूर्वक दृष्टिकोण से संतुष्ट होकर मैंने नादाँ मुल्ला नसरुद्दीन को अपने विचारों से झटक दिया।
पुराने समय में सर्वव्यापी भगवान का भय लोगों को नैतिक व्यवहार के लिए बाध्य करता था। मुझे यह प्रतीत हुआ कि अब सीसीटीवी कैमरे, जो अधिकांश जगहों में सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए हैं, लोगों में नैतिकता और विवेक बनाये हुए है - कम से कम उनके लिए जो कैमरों की उपस्थिति से अवगत हैं। कर्म, अच्छा या बुरा, निरंतर रिकॉर्ड हो रहा है - काल्पनिक चित्रगुप्त या सेंट पीटर्स द्वारा नहीं , बल्कि आधुनिक तकनीक द्वारा। वास्तव में, केवल यह संदेश कि व्यक्ति सीसीटीवी कवरेज में है, एक आदर्श व्यवहार पालन हेतु पर्याप्त है, फिर चाहे कैमरे काम कर रहे हों या नहीं।
इस संबंध में किसी विदेशी विश्वविद्यालय परिसर में एक मनोवैज्ञानिक प्रयोग किया गया था। वहां साइकिल चोरियों को कम करने के लिए, अधिकारियों ने बड़े बड़े पोस्टर लगाए, जिसमें घूरती आंखों के साथ यह चेतावनी लिखी थी कि चोरों पर निगरानी रखी जा रही है। प्रयोग से यह पाया गया कि कोई अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के बिना, केवल पोस्टरों से ही ही साइकिल चोरियों में गिरावट आ गयी थी । अच्छी तरह से डिजाइन किए गए पोस्टर विश्वविद्यालय के लिए नैतिकता के प्रभावी प्रहरी साबित हुए।
कहानी के इस छोटे से भटकाव के बाद अब मैं छीने गए मोबाइल फोन की घटना पर वापस आ जाता हूं। पहला काम था खोए हुए सिम से सभी यूपीआई पेमेंट्स और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा ब्लॉक करना। जब मैंने यह कर किया तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने अपने डिजिटल अंगों को स्वेच्छा से काट डाला हो। कोविड के बाद से मैंने कभी रूपए पैसों को हाथ नहीं लगाया था और पूरी तरह से डिजिटल भुगतान पर निर्भर रहा था । मैं बहुत कम अपने बैंक जाता हूं क्योंकि सभी लेन-देन ऑनलाइन होते हैं। मोबाइल खोने की दुर्घटना ने मुझे पैसे के लेन-देन के मामले में चार साल पीछे धकेल दिया ।
मेरे संपर्क और व्हाट्सएप चैट्स खो जाने के कारण, मैं पूरी तरह से असहाय महसूस करने लगा। शास्त्रों में लिखा हैं कि प्राचीन ऋषि - मुनि कठोर तपस्या के बाद दिव्य शक्तियां प्राप्त कर लेते थे। अप्सराओं के प्रलोभन से यदा कदा उनका तप कम हो जाता था और उनकी अर्जित दिव्य शक्तियां भी क्षीण हो जाती थी । मैं स्वयं को उसी स्थिति में पा रहा था । वर्षों और महीनों से एकत्रित किये हुए मित्रों के फ़ोन नंबर और व्हाट्सएप चैट्स जो मोबाइल में संजों के रखे थे , अब हवा हो चुके थे। बटन दबाते ही दोस्तों से वार्तालाप की सुविधा यकायक छिन चुकी थी l इस से पहले कि टेक्नोलॉजी के जानकार पाठक गूगल कांटेक्ट और व्हाट्सएप बैकअप का सुझाव दें, मैं इस कहानी के एक और प्रमुख पात्र का परिचय दें दूँ l
एक गिरगिट खतरे की स्थिति में अपनी पूंछ स्वयं काट कर फ़ेंक देता है ताकि हमलावर का ध्यान अपनी तरफ से हटा सके क्योंकि उसे पता है कि कुछ समय बाद उसकी नयी पूँछ फिर से उग आएगी । उसी तरह, मैंने बीएसएनएल टेलीकॉम कंपनी से संपर्क किया, ताकि मेरा चोरी हुआ सिम ब्लॉक किया जा सके और मुझे एक डुप्लिकेट सिम मिल जाए जिस से मैं वही नंबर आगे इस्तेमाल कर सकूं। जब मुझे बताया गया कि मेरा पोस्टपेड सिम केरल से जारी हुआ था इसलिए भोपाल में डुप्लिकेट सिम जारी नहीं हो सकता, तो मैं निराश हो गया। मुझे कहा गया कि मुझे डुप्लिकेट सिम प्राप्त करने के लिए केरल जाना होगा!
कस्टमर सर्विस सेंटर का सुझाव इतना अजीब था कि मैंने बीएसएनएल के जनरल मैनेजर से मिलने का निर्णय लिया ताकि कुछ राहत मिल सके। वहां भी मुझे वही जवाब मिला कि बीएसएनएल में सब्सक्राइबर्स का डाटा पैन इंडिया स्तर पर उपलब्ध नहीं है । मध्य प्रदेश बीएसएनएल के पास केवल राज्य के सब्सक्राइबर्स का डाटा होता है और क्योंकि मेरा सिम केरल से जारी हुआ था, वे बेबस थे। हताश होकर मैंने जनरल मैनेजर से पूछा कि अगर डुप्लिकेट सिम जारी नहीं हो सकता तो कम से कम चोरी हुए सिम को तुरंत निष्क्रिय किया जाए। इस पर भी मुझे टका सा उत्तर मिला कि केरल की पोस्टपेड सिम को वे भोपाल से निष्क्रिय नहीं कर पाएंगे । हताश हो कर मैने पूछा, “क्या आप मुझसे उम्मीद करते हैं कि सिर्फ एक कनेक्शन बंद करने के लिए मैं दो हज़ार किलोमीटर की यात्रा करूं?”
मैं अपने कानों पर विश्वास नहीं कर सका जब जनरल मैनेजर ने बर्फीले स्वर में जवाब दिया, “मैं आपको सलाह दूंगा कि आप केरल से कनेक्शन को बंद करवा लें अन्यथा आपको हर महीने बिल आता रहेगा, चाहे आप फ़ोन सेवा का उपयोग करें या न करें ।”
मैं गुस्से में बीएसएनएल ऑफिस से बाहर आया l मुझे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या बीएसएनएल का वास्तविक नाम ‘बहुत सो नहीं लिए’ होना चाहिए । यह कितना हास्यास्पद है कि एक पैन इंडिया संस्था इस डिजिटल और कनेक्टिविटी के युग में केवल राज्य स्तर पर डाटा रखती है! मैंने केरल बीएसएनएल कस्टमर केयर को एक मेल भेजा, जिसमें उन्हें सूचित किया कि कनेक्शन को बंद कर दिया जाए और भविष्य में मासिक बिल जारी न किया जाए। मैं उनका जवाब यथावत प्रस्तुत कर रहा हूं।
बीएसएनएल कस्टमर केयर केरल
सोम, 3 फरवरी, 2:26 PM (6 दिन पहले)
प्रिय सर,
हम असुविधा के लिए खेद प्रकट करते हैं। उसी नंबर के साथ सिम बदलने के लिए, आप केवल अपने मूल क्षेत्र से ही ऐसा कर सकते हैं। वर्तमान में, यह सेवा किसी अन्य राज्य या सर्कल में उपलब्ध नहीं है। हम अपने ग्राहकों की प्रतिक्रिया की सराहना करते हैं और बीएसएनएल सेवाओं में सुधार के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
बीएसएनएल कस्टमर केयर केरल
बुध, 5 फरवरी, 2:55 PM (4 दिन पहले)
प्रिय सर,
हम असुविधा के लिए खेद प्रकट करते हैं। अपने कनेक्शन की डिस्कनेक्शन का अनुरोध करने के लिए, कृपया अपने नजदीकी बीएसएनएल कार्यालय में एक लिखित आवेदन जमा करें। वर्तमान में, डिस्कनेक्शन के लिए कोई ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है।
आपकी चिंता को ध्यान में रखते हुए, बीएसएनएल अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए लगातार काम कर रहा है।
बीएसएनएल के बारे में निष्पक्षता से एक बात तो मैं दावे से कह सकता हूँ l वे सेवा और कार्य दक्षता में भले ही शिथिल हों, लेकिन उनके शिष्टाचार में कोई कमी नहीं है । हर बार उन्होंने दिल से माफी मांगी और यह भरोसा दिलाया कि वे ग्राहकों की सेवा के लिए तत्पर है ! मेरे मन में यह टीस तो फिर भी रह गयी कि बदलते समय की मांग को देख कर बीएसएनएल की गहरी तन्द्रा न जाने कब टूटेगी ?
चलते चलते मैं पाठकों को यह बता दूँ कि सरकारी बाबू के स्वभाव अनुसार मेरा नया नंबर अभी भी बीएसएनएल का ही है | न जाने मेरी भी तन्द्रा कब टूटेगी और बीएसएनएल से मेरा मोह कब छूटेगा ?



You have turned the stressful experience of losing a mobile into such an engaging and entertaining read! Your writing style is excellent!”
बीएसएनएल से मोह तो छोड़ दीजिए पर सिम नहीं। यह अभी भी भारत के अधिकांश क्षेत्रों में काम करता है, अन्य नहीं।